अगर न सुलझें उलझनें/सब ईश्वर पर छोड़। नित्य प्रार्थना कीजिये/ शांत चित्त कर जोड़।

Showing posts with label सच कहता है आइना. Show all posts
Showing posts with label सच कहता है आइना. Show all posts

Tuesday, 18 December 2012

सच कहता है आइना

सच कहता है आइना, देखें जितनी बार।
सौ टुकड़े कर दीजिये, वही सत्य सौ बार।
 
जैसा होगा आइना, वैसा दिखता रूप।
समतल अगर  हुआ नहीं, दिखे रूप विद्रूप।


 सूरत देखे आइना, सीरत जान न पाय।
झूठ रहेगा सामने, सत्य छिपा रह जाय।


 दर्पण का क्या दोष है, करते उसपर घात।
मन से अपने पूछिए, बड़े शर्म की बात।


दर्पण तो दिखला रहा, तेरा उजला रूप।
अंतर का कैसे दिखे, अंधकार मय कूप।


-कल्पना रामानी

पुनः पधारिए


आप अपना अमूल्य समय देकर मेरे ब्लॉग पर आए यह मेरे लिए हर्षकारक है। मेरी रचना पसंद आने पर अगर आप दो शब्द टिप्पणी स्वरूप लिखेंगे तो अपने सद मित्रों को मन से जुड़ा हुआ महसूस करूँगी और आपकी उपस्थिति का आभास हमेशा मुझे ऊर्जावान बनाए रखेगा।

धन्यवाद सहित

--कल्पना रामानी

Followers